Thursday, April 29, 2010

जहरीला नशा

शुरू की थी लिखनी मैंने अपनी कहानी
नज़र आने लगी उनमे सैकड़ो जवानी
जो हो रहे है धीरे धीरे बर्वाद
उस गर्त से जो शायद उनको
या वो उसको पीते है
एक छोटा सा बहाना गम को भुलाने का
या उससे बड़ा सच खुद को मिटाने का
पीकर उसे जब झूमता हु मै तब
गम नहीं पूरी दुनिया को भुलाता हु मै
जहा मुझे करना पड़ता है संघर्ष
ऐसे ही रण छेत्रों से भाग जाता हु मै
ऐसे ही कई छेत्रों के रंजो गम
बन जाते है बहाने मेरे पिने के
कर रहा हु ख़तम मै एक अस्तित्वा को
रह जायेगा जो गर्त की तहरीर मै
बन जायेगा जो आदर्श मुझ जैसो का
कुछ पन्नो किताबो कुछ तहरीरो का
और चिंता का विषय कुछ बुधिजनो का
बन जाएँगी दो चार और समितिया
रोकने को नौजवानों की सब गलतिया
देकर वो भी पुराने से कुछ उप्पे
कह देंगे हम क्या करे जब वो न कर पाए
मशीनरी भी कह देगी हमने तो किया
जितना था समय बाकि न कर पाए
लाएगा हमको दोबारा जब सत्ता मे आप
बनायेंगे एक और समिति हम और आप
राज करेंगे कई साल हम और रोते रहेंगे आप

1 comment:

  1. शुरू की थी लिखनी मैंने अपनी कहानी
    नज़र आने लगी उनमे सैकड़ो जवानी
    wah bahut khub ......................

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