Friday, April 23, 2010

प्यारा दुश्मन

तेरी फतह पर हमे नाज़ है
फिर भी हैं आंसू ये क्या बात है
शायद
तेरी जंग मे दिल का तोड़ना ही
होती है विजय का धोय्तक
पर
हमारी जुंग कुछ जुदा रहा करती है
हरदम यार पे जान फ़िदा रहती है
जहा
लुटना और टूटना हमेशा
सम्मान हुआ करती है दीवानो का
पर
तुझे आज लुटा देख
निकल आये है ये आंसू
क्योकि
दुश्मने जान की हंसी से ही
आवाद रहती है हम दीवानों की दुनिया

1 comment:

  1. दुश्मने जान की हंसी से ही
    आवाद रहती है हम दीवानों की दुनिया
    .
    .wah manu ji aapne to inhi do lino me hi sari baat kah di
    bahut badhia rachna .....:-)

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