Friday, April 16, 2010

फूल और कांटे

इस उजड़े हुए गुलशन मे कुछ फूल दिखा करते है
साथ काँटों के जो दिन रात रहा करते है
आदत सी जिन्हें हो गयी टूटकर बिखरने की
लेकिन
न कोई सुख न कोई स्वार्थ फिर क्यों है साथ
हसरत नहीं रही होगी काँटों के साथ रहने की
शायद
इसी को ही दुनिया कहती होगी सच्चा प्यार
जहा काँटों का साथ नसीब होता है
कांटे ही होते है एक जिन्हें अपना कह पाते है
कांटे ही होते है जिनसे दुःख झेलते रहते है
उजड़ने के बाद दुनिया कहा करती है
उजड़े हुए गुलशन मे कुछ फूल खिला करते थे
साथ काँटों के जो दिन रात रहा करते थे

1 comment:

  1. bahut hi achhi rachna.......
    galti se aapke dwara bheja gaya request delete ho gaya, aur mujhse send nahi ho raha...

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