Wednesday, April 7, 2010

भारत

ढूध की नदियों ,सोने की चिडियो का देश
पारस्परिक सौहार्द व एकता का देश
लक्ष्मी , स्वामी , व गाँधी का देश
बच्चो की परियो व स्वर्गो का देश
ऋषि मुनियों व ज्ञानियों का देश
कभी हुआ करता था खुसहाल ये देश
पर आज
हाथ बंधे मुह ताकता है देश
कर रहा है इंतजार एक जादूगर की
आये वो कुछ जादू दिखाए
और ला दे पुनः वो सुनहले दिन
और यहाँ का कर्णधार तो पढता है गीता
भूल गया बचनो को कहते थे
विना कर्म के फल नहीं मिलता
उसे याद है तो बस एक सूक्ति
अजगर करे न चाकरी ----
पर अब
हे देव पुत्रो उठो और
पलट दो अभी इस काया को
जो लगी हुई है धब्बे सा तुम पर
क्योकि ये है तुमारा वतन
तुम जैसे हजारो मतवालों का वतन
इसका करता धर्ता है बनना है तुम्हे
ला दो वापस मेरे इस वतन के
वो सुनहले दिन वो रुपहले दिन
ढूध की नदियों व सोने की चिडियो का देश
बच्चो की परियो व स्वर्गो का देश

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